कबीला : Kabila by Helen
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Description
चाइनीज एजेंटों की खतरनाक साजिश में फंसकर सैक्स इण्टरनेशनल की एजेण्ट मोना चुंग लाचार होकर रह गई मगर जब मलिकाए-हुस्न अपनी फुलफार्म में आई तो चाइनीज खेमे में ऐसा जलजला आ गया कि चाइनीज साजिशों के ताश के पत्तों की मानिऩ्द ढहते चले गए।
और फिर...।
कबीला : Kabila
हैलन : Helen
BookMadaari
प्रस्तुत उपन्यास के सभी पात्र एवं घटनायें काल्पनिक हैं। किसी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से इनका कतई कोई सम्बन्ध नहीं है। समानता संयोग से हो सकती है। उपन्यास का उद्देश्य मात्र मनोरंजन है। प्रस्तुत उपन्यास में दिए गए हिंसक दृश्यों, धूम्रपान, मधपान अथवा किसी अन्य मादक पदार्थों के सेवन का प्रकाशक या लेखक कत्तई समर्थन नहीं करते। इस प्रकार के दृश्य पाठकों को इन कृत्यों को प्रेरित करने के लिए नहीं बल्कि कथानक को वास्तविक रूप में दर्शाने के लिए दिए गए हैं। पाठकों से अनुरोध है की इन कृत्यों वे दुर्व्यसनों को दूर ही रखें। यह उपन्यास मात्र 18 + की आयु के लिए ही प्रकाशित किया गया है। उपन्यासब आगे पड़ने से पाठक अपनी सहमति दर्ज कर रहा है की वह 18 + है।
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कबीला
हैलन
मैंने चेहरा ऊपर उठाया।
सूरज आग के गोले की तरह तप रहा था और उसकी आंच में देखना सम्भव नहीं था। फलतः मैंने नजरें नीची की और एक क्षण को आंखों के आगे अन्धेरा छा गया।
मैं इन दिनों टिवानिया में थी।
दो दिन पहले ही मुझे थांपसन ने अपने एक प्राइवेट फ्लैट में तलब किया किया था। मैं बड़े बुझे मन से उस फ्लैट में गई थी जिसमें वह जब भी मूड होता था मुझे बुला लेता था और मुझे बेमन से जाना पड़ता था।
उस दिन भी मैं यही समझी थी।
मगर जब अन्दर पहुंची तो चौंक गई।
वहां थांपसन अकेला नहीं था बल्कि उसके साथ एक सूटेड-बूटेड नीग्रो भी था।
“यह मिस्टर क्लाइव हैं।” थांपसन ने मेरा परिचय करवाने के बाद उसके बारे में बताया—“ये टिवानिया गणतन्त्र के गृहसचिव के पद पर हैं।”
मैंने मुस्कराकर हाथ मिलाया।
उस फ्लैट में एक नौकरानी हमेशा रहती थी जिसने हमें ड्रिंक्स सर्व की।
“मगर यह क्या अकेली जायेगी?” शराब का एक घूंट भरकर क्लाइव ने कहा।
“यह अकेली ही काफी है।” थांपसन ने बड़े गर्व से कहा—“इस वक्त यह दुनिया के सबसे खतरनाक एजेन्ट की श्रेणी में शामिल कर ली गई है।”
“ओह!”
“तुम सिगरेट पी सकती हो मोना।” थांपसन ने मेरी तरफ देखा—“यह हमारी महफिल है।”
इतना ही संकेत काफी था।
थांपसन मेरा चीफ था और वह सिगरेट पीने की तभी आज्ञा देता था जब या तो वह मूड में होता था या फिर कोई गम्भीर मसला सामने होता था।
इस वक्त कोई गम्भीर मसला ही था क्योंकि वहां एक अफ्रीकी देश टिवानिया का गृह सचिव भी मौजूद था और दोनों पहले काफी चर्चा कर चुके लगते थे।
“मोना डार्लिंग।” थांपसन ने सीधे मुझे सम्बोधित किया—“मैं तुम्हें एक ऑपरेशन दे रहा हूं।”
यह मैं पहले ही समझ चुकी थी।
“मैंने यह केस टिवानिया सरकार से ले लिया है,” वह बोला—“जो बहुत रोमांचक है।”
मैंने सिगरेट का कश लिया।
“टिवानियां में इन दिनों एक बड़ा दल काम कर रहा है।” वह बोला—“जो वहां के रेगिस्तान में क्या कर रहा है यह तुम्हें पता लगाना है।”
“हूं....।” मैंने पहलू बदला।
“उसके बाद तुम्हें उस दल को खत्म करने में मुख्य भूमिका निभानी है।” थांपसन ने कहा—“इसमें तुम्हें डेमोक्रेटिक टिवानिया पुलिस की मदद मिल सकती है।”
“ओह!”
“यह काम कैसे शुरू करना है,” थांपसन ने कहा—“यह मिस्टर क्लाइव ही बतायेंगे।”
मैंने क्लाइव की तरफ देखा।
वह तो शायद मौके का इन्तजार ही कर रहा था क्योंकि थांपसन के चुप होते ही शुरू हो गया।
“यह कबीला क्या है, क्या कर रहा है,” वह बोला—“यह हम भी नहीं जान सके हैं और हमारे जिन पुलिस मैन ने यह जानने की कोशिश की उनकी हत्या हो गई।”
“आई सी!”
“मगर यह हमारी देश की सरकार के लिये घातक है, यह हमें विश्वास है।”
“जब आप यह जानते ही नहीं कि दल क्या है,” मैं बोली—“क्या कर रहा है तो फिर यह कैसे विश्वास कर लिया कि वह आपकी सरकार के लिये घातक है?”
“हमारे पुलिस अफसरों की हत्या हुई।”
“हत्या की कोई और वजह भी हो सकती है।”
“नहीं।” वह वजनदार लहजे में बोला—“मैं इसे नहीं मान सकता, क्योंकि हमने जिस भी अफसर को रेगिस्तानी निर्जन इलाके की तरफ भेजा गया था वो फिर वापस लौट कर ही नहीं आ पाया।”
“क्या उस रेगिस्तान में कोई नहीं जाता?”
“टिवानिया की यही विचित्रता है।” वह बोला—“यह एक बहुत बड़ा देश है जिसमें हर देश के लोग रहते हैं। इस पर बारी–बारी हर देश ने शासन किया और सबसे लम्बा शासन अमेरिकन्स का रहा, उसके बाद पोर्तगीज।”
“हूं....।”
“हमने दो साल पहले ही अमेरिका से सत्ता वापस ली है।” वह बोला—“एक-डेढ़ साल तक तो हमने उस रेगिस्तान की तरफ ध्यान ही नहीं दिया, मगर जब हमें यह पता लगा कि उस तरफ चीनी जाते देखे गये हैं तो हम चौंके और हमने फिर खोज करवाई जिसके आश्चर्यजनक परिणाम निकले और हमें पता लगा कि वहां एक कबीला रहता है जिसका अपना एक अलग ही साम्राज्य है।”
“ओह!”
“वह बहुत तपता हुआ रेगिस्तान है।” वह बोला—“हमने उसका सर्वेक्षण करवाया, हैलीकॉप्टर्स से जब देखा गया तो वहां सूने मकानों के सिवाय कुछ नहीं दिखा।”
“हमने जब दल भेजे तब यह नतीजा निकला कि वो गायब हो गये।” क्लाइव ने कहा—“फिर एक रात हमारे राष्ट्राध्यक्ष पर जानलेवा हमला हुआ और पुलिस ने पीछा किया तो हमलावर रेगिस्तान में जाकर गुम हो गये। अब सोचो वो क्या मंशा रखते होंगे।”
“हां, अब तो सोचना पड़ेगा।”
“हमें अब अपने देश की पुलिस पर तो यकीन नहीं है।” क्लाइव ने साफ शब्दों में कहा—“यह बात नहीं है कि वो नालायक हैं, असलियत तो यह है कि कबीले के आदमी हमारे देश की पुलिस से कहीं ज्यादा चतुर और सकर्त हैं।”
“हूं।”
कुछ देर चुप्पी छाई रही।
“यह काम तो बहुत खतरनाक है।” मैंने गाल खुजाते हुए कहा—“मगर मैं तैयार हूं।”
“देखा....।” थांपसन ने तुरन्त उचककर कहा—“मैंने कहा था न यह बहुत बहादुर लड़की है, और कोई होता तो कबीले का विवरण सुनकर घबरा जाता।”
“राइट।” उसने सिर हिलाया।
“मुझे जाना कब है?”
“मैं यह चाहता हूं कि तुम यहां से एक फरार मुजरिम के रूप में भागो।”
“अच्छा।”
“वहां इधर–उधर से भागकर आये मुजरिमों को पुलिस फौरन टटोलती है और एन्डी नामक एक नीग्रो इन अपराधियों को पनाह देने में आगे रहता है।”
“ओह!”
“एन्डी के यहां तुम जैसी हसीन लड़कियां अगर पहुंच जाती हैं तो वो उन्हें रईस अरब शेखों को बेच देता है और वो लड़कियां भी दोनों हाथ से धन बटोरती हैं।” वह पहली बार हंसा—“एन्डी भी पैसा बना लेता है।”
“एन्डी को पुलिस नहीं पकड़ती?”
“वह पहुंच वाला आदमी है।”
“यानि मुझे उसी स्टेज से गुजरना है।” मैंने दूसरे दौर का पैग लेकर कहा।
“हां....।” वह झेंपे स्वर में बोला—“तुम जैसी हसीन छोकरी को जफर कमाल खरीदता है और दूसरा भी खरीद सकता है, मगर जो भी खरीदेगा वह परेशान होगा क्योंकि पुलिस तुम्हारे लिये दबिश देगी।”
“यानि मुझे इतना खतरनाक मुजरिम बनना होगा कि तुम्हारे देश की पुलिस परेशान होती फिरे।” मैंने मुस्कराकर एक नई सिगरेट सुलगाकर कहा।
“यह तुम्हारे चीफ व्यवस्था करेंगे।” वह थांपसन की तरफ घूमकर बोला—“क्यों, ठीक है?”
“हां वो इन्तजाम मैं सोच चुका हूं।”
मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ।
थांपसन बूढ़ा अवश्य हो गया था मगर उसके दिमाग के कलपुर्जे अच्छी हालत में थे और व्यवस्था करने में तो वह मेरे लिहाज से माहिर आदमी था।
फिर उसी रात व्यवस्था हुई।
मुझे जार्जिया बनाया गया।
जार्जिया एक इंगलिश लड़की थी जिसे चौदह साल की उम्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया मगर जुर्म साबित नहीं हो सका और वह छूट गई और उसके बाद तो वह मामूली लड़की से शेरनी बन गई।
कई अपराध जुड़ते गये।
और भरी जवानी में जब वह एक होटल में अपने दो प्रेमियों के साथ झूम रही थी तब अचानक पुलिस ने रेड की और वह गिरफ्तार हो गई।
तब से वह किंगस्टन जेल में थी।
उसी रात उसे गुप्त जेल में ट्रांसफर किया गया और दूसरे दिन दोपहर में जब मैं एक फ्लाइट से उतरी तो ब्रिटेन में हल्ला मच चुका था।
मैं टिवानिया में थी।
लंच के बाद मुझे भी समाचार मिला कि जार्जिया अर्थात मैं फरार हो गई हूं। इन्टरपोल सतर्क कर दी गई थी और शाम तक यह समाचार फैल चुका था कि पुलिस सूत्रों के अनुसार जार्जिया टिवानिया में भाग कर आई है।
यह सब प्लानिंग थी।
और तब जब मैं उसी होटल के रिक्रियेशन में एक जर्मन के साथ नाच रही थी तब पुलिस ने रेड की और मैं उस होटल के पिछवाड़े से भागी।
टैक्सी मेरे लिये तैयार थी।
ड्राइवर टिवानिया पुलिस का आदमी था जिसने मुझे एंडी के अड्डे पर पहुंचा दिया।
एंडी का एक शराबखाना था।
मैंने वहां पहुंचकर लंगड़े एंडी की तलाश की जो उसी मकान में एक कमरे में मिला। वह भी गजब का आदमी था। उसे जार्जिया की पूरी कहानी पता थी और उस लंगड़े को यह भी पता था कि फलां होटल पर रेड हुई है।
“मैं मदद चाहती हूं।” मैंने अपनी राम कहानी सुनाने के बाद अन्त में यही कहा।
“तुम्हें मेरा पता किसने बताया?”
“इस लाइन के हर आदमी को दुनिया के हर आदमी की खबर रहती है।” मैं बोली—“हर ठिकाना पता रहता है, मैं तुम्हें यहां बैठे–बैठे यह बता सकती हूं कि न्यूयार्क, कैलीफोर्निया या टैक्सास में हम जैसे लोगों की कौन और किस कीमत पर मदद करता है।”
“ओह!”
“मैं अभी तो फिलहाल कड़क हूं।” मैंने अपनी जेबें थपथपाकर कहा—“मगर मामला ठण्डा होते ही मैं कोई लम्बा हाथ मारकर तुम्हारा हिसाब चुकता कर दूंगी, मेरा ख्याल है तुम इतना विश्वास तो करोगे।”
तभी एक लड़का आया।
“क्या बात है?”
“अपना सार्जेंट आया है।” वह आंख दबाकर बोला—“वह एक लड़की के बारे में पूछ रहा है जो इंगलिश है, मेरा ख्याल इस लड़की को खोज रहा है।”
“उसे खुराक देकर चलता करो।”
“ओके।”
“पिछले हिस्से में कार मंगवाओ।” वह बोला—“मैं जर्जिया के साथ बाहर जाऊंगा।”
लड़का बाहर निकल गया।
“तो तुम मेरी मदद कर रहो हो?”
“हां, उसकी कीमत की भी तुम्हें जरूरत नहीं है।” वह बैसाखी सम्भालकर बोला।
“मुझे आश्चर्य है।”
“तुम आदमखोर लड़की हो।” वह मुस्कराकर बोला—“यह मैंने सुना है और यहां पर कुछ औरतखोर सेठ भी हैं। क्या ख्याल है डीयर?”
“याने तुम मुझे बेच रहे हो?”
“बेशक?”
“तब तो तुम कीमत वसूल कर लोगे।” मैंने भी मुस्कराकर कहा—“क्यों ठीक है ना?”
“तुम भी फायदे में रहोगी।” वह बोला—“ये औरतखोर सेठ बहुत ख्याल रखते हैं।”
लड़के ने आकर खबर दी।
लगड़ा एंडी मुझे लेकर पिछले दरवाजे से निकला और एक खटारा कार में मुझे बैठना पड़ा जिसकी ड्राइविंग सीट पर एक आदमी पहले से मौजूद था।
वह मुझे एक हवेली में ले गया।
एक बूढ़े बदशक्ल अमीर आदमी ने मुझे सर से पैर तक घूरा और एंडी ने बिना देर किये सौदा कर लिया। एंडी के जाने के बाद मुझे अरब रईस के खास कमरे में जाना पड़ा और फिर शराब हल्क में उतरना आरम्भ हुई।
वह मुझ पर फिदा हुआ जा रहा था।
और तब जब रात गहरी हो गई तब अचानक पुलिस ने उसके घर रेड कर दी।
सारा काम प्लानिंग से हुआ।
जब वहां हवेली में खलबली मची हुई थी तब मैं एक नौकरानी ही सहायता से वहां से निकली और एक टैक्सी ड्राइवर को, जो पुलिस का ही आदमी था, घायल करके उस रास्ते पर भाग ली जो रेगिस्तान तक पहुंचाता था।
टैक्सी मैंने सड़क के किनारे छोड़ दी।
रात में तो ठंडक थी।
मगर सुबह तो आनी थी—और सूरज निकलना था, फिर धीरे–धीरे वह चढ़ने लगा।
दोपहर होते–होते मेरी हालत बिगड़ने लगी।
जब प्यास के मारे गला सूखने लगा तो मैंने चारों तरफ देखा और जब दूर–दूर तक किसी मकान का साया तक नजर नहीं आया तो जान निकल गई।
रेत भी गर्म होने लगी थी और पैरों में पड़ी चप्पलें गर्म होने लगी थीं। मैं उस वक्त सिर्फ एक टॉप और स्कर्ट में थी जिसके नीचे चुस्त पैंटी थी।
बदन पसीने से तर हो चुका था।
मेरे कपड़े भीग चुके थे और इच्छा कर रही थी कि गीली पैंटी उतार कर फेंक दूं। इधर चलते–चलते मेरे पैर भी बुरी तरह भर गये थे मगर रेत इतनी गर्म थी कि मैं बैठकर आराम भी नहीं कर सकती थी।
दूर–दूर तक खामोशी थी।
मुझे जो इस इलाके का क्लाइव ने ब्रीफ दिया था उसके मुताबिक यह अजीबो–गरीब रेगिस्तान था जिसमें बीच में कहीं–न–कहीं पत्थर और रेगिस्तानी पेड़–पौधे भी थे मगर वो बस्ती कहां थी यह कोई नहीं जानता था।
यह भी एक आश्चर्यजनक बात थी।
टिवानिया की सरकार यह नहीं जानती थी कि उस रेगिस्तान में बस्ती कहां है मगर कबीले के लोगों को वहां से शहरी बस्ती में पहुंचने के रास्ते पता थे।
तभी मैं चौंकी।
मैंने एक आवाज सुनी थी।
कल रात जब मैं एक स्पॉट से रेगिस्तान में प्रवेश करके कुछ कदम ही आगे बढ़ी थी कि मुझे लगा कि उल्लू बोल रहे हैं और यह आवाज सुबह के अन्धेरे में भी सुनाई दी और अभी–अभी मैंने सुनी थी।
दिन में उल्लू नहीं बोलते।
जहां तक मेरी जानकारी थी, उल्लू रात में ही बोलते हैं। मगर मैंने दिन में भी उनकी आवाज सुनी थी। फिर मैंने सर झटक दिया। मैंने सोचा हो सकता है यह मेरा भ्रम है और उस इलाके का कोई और पक्षी हो जो उल्लू की तरह बोलता हो। मैं उसे दिमाग से निकालकर आगे बढ़ी।
मुझे एक–एक कदम उठाना मुश्किल हो गया। मुझे हर कदम उठाने में तकलीफ हो रही थी और इधर प्यास के मारे गला बुरी तरह सूख रहा था।
मुझे चक्कर आने लगे।
मगर मैंने खुद को सम्भाला।
अगर मैं अपने आपको गिरा लेती तो पूरा बदन गर्म रेत में जलने लगता।
बहुत जटिल काम था।
हवा में हाथ–पैर चलाने की तरह।
न तो मुझे उस बस्ती के बारे में जानकारी थी और न उसकी कोई दिशा ही पता थी।
मुझे आश्चर्य भी था।
टिवानिया पुलिस के जवानों की लाशें रेगिस्तान की शुरूआत में ही मिल गई थीं जबकि मैं काफी आगे आ गई थी।
और अभी तक सुरक्षित थी।
लेकिन दशा बहुत खराब थी।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था मैं अभी तक बिना खाये–पिये हुए लगातार चल रही हूं। चक्कर आ रहे हैं मगर अपने आपको सम्भाले हुए भी हूं।
मगर चला नहीं जा रहा था।
मैंने एक बार रेत पर बैठ कर देखा मगर नितम्ब जब जलने लगे तो उठी लेकिन उठा नहीं गया फिर भी उठी और थांपसन के साथ–साथ क्लाइव को भी कोसने लगी।
कमबख्त ने बहुत फास्ट प्लानिंग की थी।
मुझे बहुत थोड़ी सी सूचनायें दीं।
और मुझे लगा कि अब यह अभियान छोड़कर मुझे वापस मुख्य सड़क पर लौटना पड़ेगा। आ दिन की ही गर्मी जान लेवा थी और अगर मुझे भी भटकना पड़ा तो फिर जिन्दा बचना कठिन था।
मैंने खूब सोचा।
अगर मैं वापस भी होती हूं और इंग्लैंड वापस जाती हूं तो मेरा हाल देख सुन कर चीफ भी नाराज नहीं होगा। आखिर मैं भी इन्सान हूं मशीन नहीं।
जिस हालत में मैं थी उस हालत में कल इस इलाके में मैं ज्यादा नहीं चल सकती थी क्योंकि न तो मेरे पास पीने के लिये पानी था और न खाना।
मैंने पीछे देखा।
मैं काफी आगे आ गई थी।
मगर यदि कोशिश करती तो रातों–रात चलते हुए मैं वापस सड़क पर पहुंच सकती थी और उसके बाद मुझे सीधे क्लाइव पर्क करना पड़ता।
मैं खड़ी रही।
सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी।
मैं दो–चार कदम चली मगर एक तेज चक्कर आ गया और मैं सम्भलने की लाख कोशिश करते हुए भी गिर पड़ी और एक बार तो तड़प गई।
रेत बहुत गर्म था।
मैं किसी तरह उठी और फिर उठने के बजाये वहीं बैठ गई और थूक निगल–निगल कर हलक को राहत पहुंचाई। फिर एक बार आसमान की तरफ देखा तो सूरज सर से हटकर अब उत्तर की दिशा में बढ़ा।
मेरी अजीब हालत थी।
कभी दायें होती कभी बायें होती और इस तरह अपने बदन को जलने से बचाती फिर राम–राम करके सूरज की गर्मी कम होना शुरू हुई।
मैंने बैठे–बैठे रेत में गड्ढा करना शुरू किया।
मैंने कहीं पढ़ा था कि रेत की ऊपरी पर्त अपेक्षा अन्दर की पर्त कम गर्म होती है और यह ख्याल आते ही मैंने काफी रेत उलट कर रख दी।
बात सच निकली।
भीतरी तह इतनी गर्म नहीं थी।
मैंने जेब से निकालकर रूमाल खोला फिर अपनी आंखों पर रख कर लेट गई। रेत उलटने में और भी मेहनत हो गई थी और अब तेज चक्कर आ रहे थे।
फिर मुझे होश नहीं रहा।
जब होश लौटा तब सूरज उतर चुका था और दिन अभी बाकी था। मगर मैं अपनी हालत अब बेहतर महसूस कर रही थी, हालांकि कमजोरी बहुत आ गई थी।
मैंने उठकर स्कर्ट की जेब में पड़ा रिवॉल्वर टटोला जो टिवानिया पुलिस के आदमी ने दिया था। जब वह मुझे होटल से एंडी के ठिकाने पर ले जा रहा था तब उसने रक्षा के लिये लोडेड प्वाइन्ट टू–टू का रिवॉल्वर मुझे थमा दिया था।
तभी मेरा हाथ सिगरेट के पैकेट से टकराया।
उसे तो मैं भूल ही गई थी।
मैंने सिगरेट निकालकर जलाई और चार–पांच कश लेने के बाद मुझे लगा कि मुझमें ताकत भर गई है और मैं उठी, फिर मैंने उधर देखा जिधर से आई थी।
ठंडे–ठंडे में मैं लौट सकती थी।
मैंने हिसाब लगाया कि मैं रात में कुछ ही घण्टों में काफी लम्बी यात्रा करके यहां तक आई थी और अब टैक्सी में इतना पेट्रोल नहीं बचा होगा कि वापस जाती, मगर फिर भी उसके अन्दर इतना कष्ट नहीं होता जितना यहां हुआ था और जितना बचा पेट्रोल होता मैं यात्रा कर लेती।
फिर मैंने दूसरी तरफ देखा।
दूर–दूर तक वीराना था।
तभी लालच आ गया।
दिन की तकलीफ मैं भूल गई और ललचा गई, फिर कदम आगे बढ़ गये।
मैंने सोचा थोड़ा और बढ़ा जाये।
हो सकता है कोई ऐसी जगह मिल जाये जहां मैं आश्रय ले सकूं और शायद वहां कुछ खाने–पीने का सामान भी मिल जाये। फिर आगे की प्लानिंग करूं।
यही सोच कर मैं बढ़ी।
तभी ठिठक गयी।
शाम हो चुकी थी।
सूरज उतर चुका था मगर अभी इतना उजाला था कि मुझे सब साफ नजर आता था।
मैंने एक साया देखा था।
मेरा हाथ स्कर्ट की जेब पर चला गया और फिर मैंने दूसरी तरफ नजरें घुमाईं।
दूसरी तरफ एक और साया था।
मुझे लगा कि मैंने सही निर्णय लिया है और अब कुछ होने वाला है।
एक साया तेजी से मेरी तरफ आ रहा था जबकि दूसरा धीरे–धीरे बढ़ रहा था। मैंने देखा कि वह मेरी अपेक्षा रेत पर तेजी से बढ़ता आ रहा है।
मैंने रिवॉल्वर निकाल ली।
वह बढ़ता ही आ रहा था।
मैंने देखा वो लम्बे कद का आदमी था जिसके शरीर पर कपड़े नहीं चीथड़े थे और वह यह देखने के बाद भी कि मेरे हाथ में रिवॉल्वर है, बढ़ा आ रहा था।
मैंने रिवॉल्वर तानी।
तभी मेरे हलक से चीख निकली और मैं रेत पर मुंह के बल गिरी और उसके साथ ही रिवॉल्वर भी मेरे हाथ से छूटकर गिर पड़ा।
मेरा ध्यान सामने ही केन्द्रित था।
मैं दायीं तरफ तो देख लेती थी जिधर से दूसरा आदमी बढ़ रहा था मगर पीछे पलट कर नहीं देखा था जिधर से एक आदमी ने आकर धक्का दिया।
मैं रेत थूकते हुये उठी।
तभी सामने वाले ने मेरे हाथ पकड़ लिये और मुझे कन्धों पर लाद लिया और बढ़ा।
न कुछ कहा न सुना।
वह बड़ी तेजी से बढ़ा और मुझे जब उसने काफी देर बाद उतारा तो मैं एक छोटी–सी बस्ती में थी और आसमान में चांद अपना चेहरा दिखा चुका था।
उस रात पूर्ण चन्द्र था।
मैं आश्चर्य में डूबी हुई थी।
दिन में मैंने दूर–दूर तक नजरें दौड़ाई थीं मगर मुझे कहीं बस्ती नजर नहीं आई थी जबकि यह थोड़ी देर में ही एक ऐसी जगह पर ले आया था जहां न सिर्फ छोटी–सी बस्ती थी बल्कि पथरीली जमीन भी थी।
मेरे अनुमान से वह शार्टकट रास्ते से आया था।
फिर भी रात हो गई थी और चांद इतना निकल आया था कि मैं उस बस्ती के मकानों के साये देख पाती। लेकिन आश्चर्य था किसी मकान में रोशनी नहीं थी जबकि मेरे वहां पहुंचते ही हलचल मच गई थी।
हर मकान से लोग निकल रहे थे।
औरतें भी थीं।
मगर सब फटे हाल।
किसी के शरीर पर न तो ढंग के कपड़े थे और न शक्ल ही ठिकाने की थी। सबके चेहरे सूखे हुये थे, बदन से बदबू आ रही थी। वहां मौजूद हर मर्द मुझे भूत नजर आता था और औरत चुड़ैल दिख रही थीं।
उन्होंने मुझे घेर लिया।
एक औरत ने चुड़ैल की तरह चिल्लाकर अपने पैने नाखून मेरी तरफ बढ़ाये मगर मैंने साहस और ताकत बटोर कर उसके पेट में एक लात जमा दी।
मुझे बेहद आश्चर्य हुआ था।
वह लात अगर किसी सामान्य औरत के पेट पर पड़ी होती तो वह रो देती और दोहरी होकर बैठ जाती मगर उस चुड़ैल के असर ही नहीं हुआ।
तभी मैं चिल्लाई।
दूसरी औरत भी मुझ पर झपट पड़ी थी। और मैंने पूरी ताकत लगा कर उन दोनों औरतों से बचना चाहा। मगर उनमें बहुत ही असामान्य ताकत थी और वो दोनों औरतें मुझ पर हावी हो गईं।
मैंने हर दांव आजमाया।
मगर असफल रही।
मेरे कपड़े उन चुड़ैलों ने जगह–जगह से फाड़ दिये और मेरे वक्ष पर गुस्सा उतारा।
मैंने किसी तरह खुद को बचाया।
वो सब एक जगह एकत्र हैं यह मैंने देख लिया था और फिर मैं दौड़ी।
उस वक्त मैं हंसी थी जब मुझे क्लाइव ने बताया था कि उस इलाके में भूत–प्रेत वास करते हैं, ऐसा कहा जाता है, और इसीलिये लोग उस तरफ जाने की हिम्मत नहीं करते, क्योंकि वो प्रेत कभी सड़क तक भी आ जाते थे।
मगर अब मुझे रोना आ रहा था।
हम भूत–प्रेतों की मौजूदगी को नकारते हैं और उनका अस्तित्व स्वीकार नहीं करते थे लेकिन जिस तरह के लोगों के बीच मैं फंसी थी उनके बीच आकर मुझे यह लगने लगा था कि वाकई यहां भूत–प्रेत हैं।
मुझे अपनी रिवॉल्वर का अफसोस था।
पता नहीं कितनी दूर थी।
तभी मैं रुकी।
एक भूत मेरे सामने मेरा रास्ता रोके खड़ा था और मैं जो बुरी तरह से हांफ रही थी एक बार घूमी पर तब तक दूसरा पीछे से आया।
मैं घिर गई।
फिर एक ने मुझे मारना आरम्भ किया और बाद में वो औरतें आ गईं जिन्होंने मेरी स्कर्ट भी तार–तार कर दी और यहां तक कि पैंटी भी उतार फेंकी।
औरतें भी मार रही थीं।
मैं चिल्ला रही थी।
फिर तो मेरी चीख निकल गयी।
उनमें से एक आदमी ने मेरे बाल पकड़ लिये और खींचते हुए बस्ती की तरफ ले जाने लगा। इस डर से कि वह राक्षस मेरे बाल ही न उखाड़ दे, मैं खुद ही उसके कदम के साथ कदम मिला रही थी।
मुझे बीच मैदान में पटक दिया गया।
मेरी बड़ी बुरी दशा थी।
वो लोग आराम से मुझे घेरकर बैठ गये थे और औरतें मकान के अन्दर से उनके खाने के लिये कुछ हाथों में ला रही थीं, फिर मैंने जोर से सांस ली।
वातावरण में अजीब सी गन्ध फैल रही थी।
ड्रग।
वो निश्चित रूप से ड्रग की गन्ध थी जो वहां मौजूद हर आदमी और हर औरत से आ रही थी। मुझे अचानक ही लगा कि सारी समस्यायें हल हो गई हैं।
हर सवाल का जवाब मिल गया है।
मैं मन-ही-मन हंसी।
लोग इन लोगों को भूत–चुड़ैल समझते थे और एक बार तो मुझे भी उनकी तरह विश्वास करने पर मजबूर होना पड़ा था। लेकिन अब याद आ रहा था।
मैंने कहीं पढ़ा था।
कुछ लोग इन्सानों को ड्रग दे-देकर उसका आदी बना देते हैं, यह तो सर्व विदित है मगर उस पुस्तक या पत्रिका मैं मैंने ऐसे लोगों का विवरण पढ़ा था जिन्हें जोम्बीन के नाम की संज्ञा दी गई थी।
विवरण रोचक था।
मैं पूरा पढ़ गई थी और अब मुझे याद आ रहा था कि लोगों को ड्रग दे-देकर इस दशा में पहुंचा दिया जाता है कि वो इन्सानों की श्रेणी से हट जाते हैं।
न वो खाते हैं न पीते हैं।
बस ड्रस पर जिन्दा रहते हैं और उसके प्रभाव के कारण उनमें आश्चर्यजनक ढंग से ताकत आ जाती है। वो ड्रस इनकी खुराक बन जाती है जिसके प्रभाव के कारण इनके चेहरों की हड्डियां उभर आती हैं आंखों में गड्ढ़े पड़ जाते हैं और इनके अन्दर का इन्सान मर जाता है।
इस हद तक कि सेक्स शून्यता आ जाती है। जिस तरह से इन्हें खाने–पीने की आवश्यकता नहीं होती उसी तरह इनकी शारीरिक भूख भी मर जाती है और विपरीत सेक्स के प्रति देह आकर्षक खत्म हो जाता है। ये बहुत खतरनाक किस्म के हो जाते हैं और उस आदमी के दुश्मन बन जाते हैं जो इनकी जमात से बाहर का अर्थात इनकी तरह जोम्बीज नहीं होता है।
जैसे इस वक्त मैं थी।
मगर ये अपने मालिक के गुलाम होते हैं।
इनके मालिक वो होते हैं जो इन्हें ड्रस देते हैं। वो इनके देवता होते हैं। अगर इनके मालिक आदेश दे देते हैं कि फलां को मार दो, यह खत्म कर देते हैं।
सारे राज खुले जा रहे थे।
क्लाइव ने बताया था कि उनकी पुलिस के बहुत से ऑफीसर या तो मर गये थे या फिर गायब हो गये थे और अब मुझे लग रहा था वो इनके शिकार हुए थे।
जो मर गये वो मर गये मगर जो गायब हो गये वो हो सकता है इन्ही जोम्बीज की भीड़ में कहीं छिपे हों और ड्रग के आदी बन गये हों।
मेरी रग–रग दुख रही थी।
मगर मैं उस दर्द को पी रही थी और लग रहा था कि वाकई इस रेगिस्तान के गर्भ में कोई खतरनाक कबीला अपना अलग ही अस्तित्व बनाये है।
वो सिर्फ खतरनाक ही नहीं चालाक भी है।
उदाहरण के लिये जोम्बीज थे।
ये जोम्बीज उन्हीं के दिमाग की उपज लगते थे जो उन लोगों ने इस क्षेत्र में चौकीदारों की तरह छोड़ रखे थे, जिन्हें आम आदमी देखता तो वो भूत समझ कर डर जाता और इनके पास फटकने की हिम्मत नहीं करता और जो आने की हिम्मत करता उसे मार डालते।
तभी एक बात याद आई।
जोम्बीज की एक विशेषता थी।
इन्हें दिन में नहीं दिखता था, मगर रात के अन्धेरे में बहुत साफ दिखता था, जिसकी वजह शरीर में बहुत ज्यादा ड्रग पहुंचना होता था और यही कारण था उस बस्ती में मुझे एक भी लैम्प या लालटेन नहीं दिखी थी।
उन्हें सब साफ दिखता था।
वो बड़े मजे से ड्रग्स ले रहे थे और मैं उनके बीच निर्वस्त्र अवस्था में पड़ी हुई थी।
फिर उनमें से एक उठा और बड़ी बेरहमी से मुझे उठाकर खड़ा कर दिया और अपने कन्धे पर लाद लिया। वह मुझे पता नहीं कहां लिये जा रहा था।
मैं उसके कन्धे पर थी।
उसके साथ एक और जोम्बी था।
फिर वह रुका और मैंने खड़खड़ाहट की आवाज सुनी। ऐसा लगा जैसे कोई लोहे का दरवाजा खोला गया हो और वह मुझे लेकर आगे बढ़ा, फिर रुक गया।
मेरी दिल हिला देने वाली चीख गूंज गई और उसके साथ ही अन्धेरा छा गया।
मैं अचेत हो गई थी।
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Additional information
Book Title | कबीला : Kabila by Helen |
---|---|
Isbn No | |
No of Pages | 174 |
Country Of Orign | India |
Year of Publication | |
Language | |
Genres | |
Author | |
Age | |
Publisher Name | Ravi Pocket Books |
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