ब्लैक डेविल : Black Devil by Helen
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Description
लंदन की जासूसी संस्था ‘सेक्स इण्टरनेशनल’ की रंगीन मिजाज जासूस मोना चुंग का जानलेवा अंदाज।
रोमांस और रोमांच के जलवे बिखरती ‘सेक्स इण्टरनेशनल’ की रंगीन मिजाज जासूस जो अपने चाहने वालों के लिए मस्ती का सागर है तो दुश्मनों के लिए काल!
मामूली अपहरण से शुरु हुआ एक ऐसा खतरनाक मिशन जिसमें कदम-कदम पर मौत का जाल बिछा था मगर सेक्स इणटरनेशनल की इस खतरनाक जासूस मोना चुंग ने अपने हुस्न की तलवार से उस जाल को काटना शुरु किया तो...?
ब्लैक डेविल : Black Devil
हैलन : Helen
प्रस्तुत उपन्यास के सभी पात्र एवं घटनायें काल्पनिक हैं। किसी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से इनका कतई कोई सम्बन्ध नहीं है। समानता संयोग से हो सकती है। उपन्यास का उद्देश्य मात्र मनोरंजन है। प्रस्तुत उपन्यास में दिए गए हिंसक दृश्यों, धूम्रपान, मधपान अथवा किसी अन्य मादक पदार्थों के सेवन का प्रकाशक या लेखक कत्तई समर्थन नहीं करते। इस प्रकार के दृश्य पाठकों को इन कृत्यों को प्रेरित करने के लिए नहीं बल्कि कथानक को वास्तविक रूप में दर्शाने के लिए दिए गए हैं। पाठकों से अनुरोध है की इन कृत्यों वे दुर्व्यसनों को दूर ही रखें। यह उपन्यास मात्र 18 + की आयु के लिए ही प्रकाशित किया गया है। उपन्यासब आगे पड़ने से पाठक अपनी सहमति दर्ज कर रहा है की वह 18 + है।
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ब्लैक डेविल
हैलन
मैंने तुरन्त छलांग लगा दी।
अगर ऐसा न किया होता तो वो गोली जिसने अभी-अभी दीवार का प्लास्टर उखाड़ दिया था, मेरे सर में लगती और मैं सेक्स की वेदी पर शहीद हो जाती।
मैं आजकल मिटुम्बा में थी।
अभी दो दिन पहले जब मैं लन्दन के फोर्ड क्लब में पिंगपोंग खेल रही थी तब मुझे थाम्पसन का फोन मिला। थाम्पसन के फोन के बारे में मेरी हमेशा यही शिकायत रही कि वो बेवक्त आता है। उस वक्त भी मुझे उसका फोन मिलना भला नहीं लगा। एक राऊन्ड हो चुका था जो मैंने जीता था और जब दूसरा शुरू होने वाला था तब बीच में बाधा डाली क्लब की अटेन्डेन्ट ने। मजबूरन मुझे खेल छोड़ना पड़ा। फोन पर थाम्पसन ने फौरन बुलाया। न चाहते हुए भी मैं ऑफिस पहुंची और जाते ही पहले अपने बूढ़े चीफ के चेहरे का निरीक्षण किया मगर वहां ऐसे कोई भाव नहीं थे जिनसे अनुमान होता कि कोई गम्भीर समस्या आ खड़ी हुई है।
“बैठो।” वह मुस्कराया।
मैं एक कुर्सी खींचकर बैठ गई।
“मैंने तुम्हें एक काम से बुलाया था।”
“वो तो मैं तभी समझ गई थी जब आपके फोन के बारे में सूचना मिली थी।”
“कर्नल ब्रूज को जानती हो?”
“यह साहब कौन हैं?”
“वही जिन्होंने पिछले वर्ष पांच अफ्रीकी युवकों को गिरफ्तार करवा दिया था।”
“समझी।” मैं बोली—“वे पांचों शायद एक प्लेन हाईजैक का प्लान बना रहे थे।”
“यस....यस!”
“बाद में उन पांचों ने कुछ भी बताने के पहले जेलखाने में आत्महत्या कर ली थी।”
“यस!”
“क्या वे पांचों फिर जिन्दा हो गये हैं?”
थाम्पसन ने एक बार मेरे चेहरे का गौर से निरीक्षण किया फिर हंस दिया।
मैं उसी तरह बैठी थी।
“पांचों जिन्दा तो नहीं हुए लेकिन कर्नल ब्रूज पर जरूर मुसीबत आ गई है।”
“कैसे?” मैंने पूछा।
“अभी पिछले महीने उन्होंने मिस एलना से विवाह किया था।” वह कह रहा था—“लेकिन दो दिन पहले अचानक एलना घर से गायब हो गई।”
“ब्रूज की क्या उम्र थी?”
“चालीस से ऊपर होगी।”
“एलना की?”
“बीस या बाईस।” थाम्पसन ने बताया—“लेकिन तुम उसके बारे में सवाल क्यों कर रही हो?”
“एलना के गायब होने का कारण, तलाश करने की कोशिश कर रही हूं।”
“मगर उम्र!”
“जनाब एलना के गायब होने की वजह उम्र ही है।” मैं बोली—
“आखिर भागती नहीं तो क्या करती, आप ही सोचिये वह बेचारी कैसे सन्तुष्ट हो सकती थी?”
“बात ये नहीं है मोना।”
“फिर?”
“बात कुछ और ही है।”
“क्या?”
“एलना जिस दिन गायब हुई थी उस दिन कोठी के नौकर ने एक नीग्रो को देखा था।”
“अच्छा!”
“वह कोठी के इर्द-गिर्द दो-तीन बार घूमता नजर आया।” बूढ़े ने बताया—“नौकर का कहना है कि उसे उसके भाव अच्छे नजर नहीं आये और एक बार उसने नीग्रो को टोका भी जिसके बाद वह फिर नजर नहीं आया।”
“यानि कर्नल ब्रूज को शक है कि एलना के गायब होने में उस नीग्रो का हाथ है?”
“हां!”
“तो मुझे करना क्या है?”
“एलना का पता लगाना है।”
“बस?”
“हां, और उसके लिए मैंने एक सूत्र नीग्रो दे ही दिया है, अब तुम्हारा अपना काम है।”
“सूत्र तो बड़ा बेतुका है।”
“क्यों?”
“भई सिर्फ यही तो पता है कि एक नीग्रो कोठी के इर्द-गिर्द घूम रहा था।” मैं बोली—“अब वो कौन था, क्या काम था, कैसी सूरत थी, यह कुछ भी नहीं पता।”
“यह सब तो तुम्हें पता करना है।”
“वो तो करूंगी ही।”
“यह रहा कर्नल ब्रूज का पता।” थाम्पसन ने एक कार्ड मेरी ओर बढ़ाते हुए कहा।
“तो मैं चलूं?”
“बिल्कुल!” थाम्पसन ने कहा—“कर्नल ब्रूज ने हमारी पूरी फीस एडवांस में दे दी है।”
“यानि काम तेजी से करना है?”
“बिल्कुल!”
“तब तो मैं चली।” मैं कुर्सी खिसका कर उठ खड़ी हुई—“अब केस की समाप्ति पर मिलूंगी।”
“बशर्ते कि एलना यहीं हो।”
“देखा जायेगा।”
मैं आफिस से बाहर आई।
कर्नल का पता मेरे पास था ही।
मैंने कार की ड्राइविंग सीट सम्भाली और कर्नल के घर की ओर रवाना हो गई।
कर्नल ब्रूज की कोठी बहुत खूबसूरत थी, एक मंजिला होने के कारण आस-पास की इमारतों से छोटी अवश्य लगती थी मगर उनकी अपेक्षा सुन्दर थी।
कोठी का गेट खुला था।
मैं कार भीतर ले गई।
पोर्च में एक कार पहले से ही खड़ी थी जो कर्नल ब्रूज की ही रही होगी।
उस कार के पीछे अपनी कार रोककर मैं उतरी और काल बैल का बटन दबाया।
दरवाजा तुरन्त खुला।
“कर्नल हैं?” मैंने सामने खड़े व्यक्ति से पूछा जो शायद कोठी का नौकर था।
“यस!”
“मेरा कार्ड उन्हें दो।” मैंने वैनिटी बैग से अपना कार्ड निकाल कर उसे दिया।
नौकर कार्ड लेकर भीतर चला गया और कुछ देर बाद ही वापस भी आ गया।
“चलिये।”
मैं आगे बढ़ी।
कई कमरों को पार करने के बाद मैं एक बड़े से कमरे में पहुंची। कमरे में बहुत ही धीमी रोशनी हो रही थी जिसमें मैंने एक व्यक्ति को खिड़की के पास खड़े देखा। लम्बे कद का वह गोरा व्यक्ति एक काला गाऊन पहने हुए था। हमारे यहां काला वस्त्र शोक मनाने के लिये पहना जाता है। शायद कर्नल एलना का शोक मना रहा था।
नौकर मुझे उस कमरे में छोड़कर चुपचाप सर झुकाये हुए चला गया।
कर्नल अभी भी मेरी ओर पीठ किये हुए खिड़की के आर-पार देख रहा था।
मैंने कदम बढ़ाये।
“कर्नल!” मेरे मुंह से निकला।
“ब्रूज।” उसने पहले ही बोल दिया।
“मैं....।”
“जानता हूं।” वह अभी भी उसी तरह खिड़की के उस पार देख रहा था।
एक क्षण को मैं चुप रह गई।
फिर वह मेरी ओर पलटा।
कर्नल के एक हाथ में शराब का गिलास था, जिसमें थोड़ी सी शराब बची हुई थी।
“शायद तुम्हें ही थाम्पसन ने एलना की खोज के लिए नियुक्त किया है?”
“हां।” मैंने कर्नल ब्रूज के चेहरे का गौर से निरीक्षण करते हुए उत्तर दिया।
“क्या पियोगे?” कर्नल ने उस टेबिल की ओर बढ़ते हुए पूछा, जिस पर शराब की बोतल के साथ सोडा, साइफन और गिलास रखे हुए थे।
“मैं व्हिस्की पसन्द करती हूं।”
कर्नल ने खुद ही दो गिलास तैयार किये और मैं अब खिड़की की तरफ बढ़ गई, जहां कर्नल खड़ा हुआ था। खिड़की एक बगीचे में खुलती थी, बगीचे के बीच में एक जाफरी का गोल कमरा बना हुआ था।
“मेरा ख्याल है थाम्पसन ने पूरा विवरण तो तुम्हें दे ही दिया होगा?” वह बोला।
“हां।” मैंने उसके हाथ से व्हिस्की का गिलास लेकर कहा—“और मैं आज से ही काम शुरु कर देना चाहती हूं, इसीलिए मैंने आपको इस समय तकलीफ दी है।”
“मुझसे क्या जानना चाहती हो?” वह भी अपना गिलास लिये खिड़की के पास आ गया।
“कुछ बातें।”
“मसलन?” उसने मेरी ओर देखा।
मेरी नजरें फिर बगीचे के बीच में बने हुए जाफरी के गोल कमरे पर टिक गई थीं।
“एलना से आपका विवाह कब हुआ था?” मैंने कर्नल ब्रूज से पहला सवाल कर डाला।
“पिछले माह।”
“प्रेम विवाह रहा होगा?”
“हां।” कर्नल ने एक ठण्डी सांस ली—“वो दिन मैं कभी नहीं भूलूंगा जब मेरी एलना से पहली बार मुलाकात हुई थी।” एक क्षण रुककर वह बोला—“वो शाम मेरी जिन्दगी की एक अहम शाम थी, जब मेरा आजीवन अविवाहित रहने का प्रण टूट गया।”
“वह लन्दन में ही मिली?”
“हां।” वह गिलास की व्हिस्की का एक घूंट लेकर बोला—“हर शाम की तरह उस शाम भी मैं हिल एरिया में होटल मिन्ट के हॉल में बैठा हुआ पी रहा था।”
मैं उसी की ओर देख रही थी।
“होटल मिन्ट में आने वाले सभी मेरे स्वभाव से परिचित थे, इसलिये हॉल की सारी सीटें भरी होने के बावजूद भी लोग मेरी टेबिल पर बैठने की अपेक्षा काउन्टर पर खड़े रहना ज्यादा पसन्द करते थे लेकिन उस दिन एलना मेरे पास आई।”
मैंने उसकी ओर देखा।
“जो भोलापन मुझे उस लड़की के चेहरे पर नजर आया, जो आकर्षण उसके व्यक्तित्व में था वो मुझे उस दिन से पहले किसी लड़की में नजर नहीं आया था।”
“हूं।”
“एलना ने मुझसे बैठने की आज्ञा मांगी और मैंने दे दी।” कर्नल ब्रूज फिर बगीचे की तरफ देखने लगा।
हालांकि ये प्रेम कहानियां मुझे बोर करती हैं, मगर फिर भी सुनना तो था ही।
“हम दोनों फिर रोज वहीं मिलने लगे और रोज की यह मुलाकात प्यार में बदल गई।” वह फिर बहक गया—“और हम ने पिछले माह शादी करने का फैसला कर डाला।”
मैंने चैन की सांस ली, क्योंकि कर्नल ब्रूज की प्रेम कहानी जल्दी खत्म हो रही थी।
“मगर दुर्भाग्य ऐसा कि हम लोग एक मास ही प्रेम से रह पाये।” वह बोला—“और परसों एलना गायब हो गई।”
“एलना गायब हो गई, यह आप किस आधार पर कह रहे हैं?” मैंने अपना गिलास खाली किया।
“कई बातें हैं।”
“कैसी?”
“पहली बात तो यह कि एलना अपनी आदत के खिलाफ किसी से बताकर नहीं गई।” वह बोला—“दूसरी बात वो रात के समय गायब हुई और तीसरी तथा अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बात या आधार ये है कि एलना केवल नाइटी ही पहने हुए है, उसके सारे कपड़े मुझे घर में ही मिले हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि उसका अपहरण हुआ है।”
“जिस रात एलना का किस्सा हुआ उस रात कोठी में कौन-कौन मौजूद था?”
“सिर्फ मेरा नौकर।”
“और आप?”
“मैं ड्यूटी पर था।” कर्नल ने बताया—“कभी-कभी मुझे रात में भी जाना होता है।”
“आप सर्विस में हैं?”
“हां।”
“कहां?”
“कोलरीज में सिक्योरिटी ऑफिसर हूं।”
“आपको एलना की गैर मौजूदगी का पता कब चला?”
मैंने जेब से एक सिगरेट निकाली।
“सुबह।”
“कैसे?”
“मैं जब ड्यूटी से वापस आया तो मुझे एलना कोठी में नजर नहीं आई।” कर्नल ने बताया—“नौकर से पूछा, तब उसने भी यही बताया कि उसे एलना के बारे में पता नहीं।”
“अच्छा।”
“मैंने सोचा शायद कहीं टहलने निकल गई है, लेकिन जब लन्च तक नहीं आयी तो मुझे शंका हुई और मैंने नौकर से फिर पूछा और उसने यह बताया कि कल रात कोठी में उससे कोई मिलने नहीं आया, हां एक अफ्रीकी को उसने अवश्य देखा।”
“यह भी तो हो सकता है कर्नल कि एलना का अपहरण किया गया हो?”
“जो भी हो, फिलहाल वो गायब तो है ही।”
“आपने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई?”
“हां, उसी दिन मगर रात में।”
“एलना के कुछ नाते-रिश्तेदार या दोस्त वगैरह तो होंगे ही?” मैंने पूछा।
“हां, उसके कई रिश्तेदार और मित्र हैं और मैं सभी से मिल चुका हूं, मगर किसी को एलना का पता नहीं।” कर्नल ने बताया—“जब सब ओर से निराश हो गया, तब थाम्पसन के पास पहुंचा।”
“आपने पिछले साल कुछ अफ्रीकियों को पकड़वाया था, जो प्लेन हाईजैक का प्लान बना रहे थे।”
“हां।”
“क्या वो किस्सा मुझे बतायेंगे?”
“मगर उससे एलना का क्या सम्बन्ध?”
“आप शायद भूल रहे हैं कि नौकर ने एलना के अपहरण वाले दिन एक अफ्रीकी को कोठी के इर्द-गिर्द संदिग्ध अवस्था में घूमते देखा था।” मैंने उसे याद दिलाया।
“ओह!” उसकी ‘ओह’ जरा कुछ ऊंची खिंच गई—“आई सी, मगर उसकी एलना से क्या दुश्मनी हो सकती है, जब उसका केस हुआ था तब तो मेरी शादी भी नहीं हुई थी।”
“फिर भी आप बता डालिये।”
ब्रूज सोच में पड़ गया।
“भूमिका बनाने की तकलीफ करने की कोई आवश्यकता नहीं।” मैंने उसे रोक दिया।
“मैं बात शुरु करता हूं उस रात से जिस रात मैं नेजल क्लब के बाहर एक अफ्रीकी से टकरा गया।” कर्नल ने इस तरह कहना शुरु किया—“वह काफी जल्दी में था। पता नहीं क्यों मुझे उस पर सन्देह हो गया। बस मैं दोबारा उसके पीछे नेजल में घुसा और काउन्टर से ही हॉल में बैठ हुए उस अफ्रीकी पर नजर डाली।”
मैं गोर से सुन रही थी।
“वह अपनी सीट पर अकेला बैठा हुआ था। व्हिस्की का गिलास उसके सामने था, मगर वह पीने के बजाय बेताबी से क्लब के हॉल के प्रवेश द्वार की ओर देख रहा था। बीच-बीच में वह कलाई पर बंधी घड़ी भी देख लेता था। उसकी हरकतें मेरा सन्देह और गहरा करती जा रही थीं। तभी वहां एक और अफ्रीकी ने प्रवेश किया, वह तीर की तरह उसकी मेज की ओर आया और पहले वाले से कुछ बात की। पहले वाले ने जल्दी से गिलास उठाकर एक ही सांस में व्हिस्की समाप्त की, फिर टेबिल पर गिलास के नीचे नोट दबाकर बाद वाले के साथ बाहर निकल गया।” कर्नल ने रुककर सांस ली, फिर कहना आरम्भ किया—“मैं उन दोनों के पीछे था। वे दोनों बाहर निकल कर एक कार में बैठे। मैंने अपनी कार से उसका पीछा किया।”
मैंने सिगरेट सुलगा ली।
“मैं इस खूबी के साथ उनका पीछा करता रहा कि उन्हें पता भी नहीं चल सका।” कर्नल ब्रूज बोला—“उनका पीछा करता हुआ मैं साहिली इलाके में एक होटल में पहुंचा। उस होटल में दो और अफ्रीकी बैठे थे। इन दोनों के पहुंचने पर वे चारों हॉल से उठकर केबिन में चले गये। संयोगवश पास वाला केबिन खाली था, उसमें मैं घुस गया और उनकी बातें सुनने लगा। वे लोग उसी रात एक प्लेन हाइजैक का प्लान बना रहे थे, लेकन मैंने उसकी योजना फेल करते हुए उन सबको गिरफ्तार करवा दिया, फिर उनका पांचवां साथी भी पुलिस ने पकड़ लिया।”
“बस?”
“बस यही कहानी है।”
“उस होटल का नाम क्या है?”
“ब्लू।”
“थैंक्स।” मैंने खाली गिलास टेबिल पर रख कर उसकी ओर हाथ बढ़ाया, “बस एलना की कोई हाल की ही खिचीं हुई तस्वीर दे दीजिये।”
“तो मैं एलना की वापसी की उम्मीद रखूं?” कर्नल ने मुझसे हाथ मिलाते हुए कहा।
“क्यों नहीं, मगर फोटो....?”
“यह लीजिये।” कर्नल ने एक फोटो दी।
“जैसे ही कोई महत्वपूर्ण बात पता चलेगी, मैं तुरन्त आपसे मिलने की कोशिश करूंगी।”
“मैं इन्तजार करूंगा।”
मैं बाहर निकल आई।
नौकर बाहरी भाग में मिल गया।
“सुनो?”
“यस मादाम।” वह मेरी ओर आया।
“मैं कौन हूं शायद यह तुम्हें पता नहीं होगा?” मैंने उसके पास आने पर पूछा।
“जानता हूं।” वह बोला—“आप जासूस हैं और मादाम की तलाश कर रही हैं।”
“मादाम के गायब होने के बारे में सबसे पहले शायद तुम्हें ही पता चला।”
“जी हां।”
“कब?”
“सुबह।”
“कैसे पता चला?”
“मैं आठ बजे रोज की तरह नाश्ता लेकर उनके कमरे में पहुंचा, मगर मादाम नहीं थी।” नौकर ने बताया—“मैंने पूरी कोठी छान मारी, मगर नहीं मिली।”
“अच्छा।”
“मैंने सोचा शायद कही चली गई होंगी, मगर साहब के आने तक जब वो वापस नहीं आई तो उनके गायब होने का मामला सामने आया।”
“कोई अफ्रीकी शायद कोठी के इर्द-गिर्द घूमता नजर आया था?” मैंने पूछा।
“हां।”
“कब?”
“मादाम के गायब होने के एक दिन पहले की बात है।” नौकर ने उत्तर में कहा।
“तुम्हें यह कैसे शक हुआ कि वो तुम्हारी ही कोठी की निगरानी कर रहा है?”
“वह बार-बार कोठी की ही तरफ देखता था।” नौकर ने मेरे सवाल के जवाब में कहा।
“किस हिस्से की तरफ देखता था?”
“जी?” नौकर सवाल नहीं समझ पाया।
“मेरा मतलब है वो कोठी के किस हिस्से की तरफ ज्यादा देखता था?”
नौकर ने एक क्षण सोचा, फिर बोला—“वो कोठी के दायें भाग की तरफ ज्यादा देखता था, वैसे कभी-कभी सामने की ओर भी देखता था।”
“दायीं तरफ तो शायद एलना का कमरा है?” मैंने कर्नल वाले कमरे की स्थिति पर ध्यान देकर कहा।
“हां।”
“तुमने उस अफ्रीकी को टोका भी था?”
“हां।”
“क्या कहा?”
“मैंने पूछा क्या बात है, इस तरफ क्यों चक्कर लगा रहे हो।” वह बोला—“उसने जवाब में मुझे डांटते हुए कहा जाओ-जाओ अपना काम करो।”
“हूं।”
“इसके बाद फिर वो दिखा भी नहीं।”
“एलना के बारे में कितना जानते हो?”
“कैसा?”
“उसका स्वभाव कैसा था?”
“बहुत ही मीठा स्वभाव था।”
“एलना और कर्नल की कैसी निभती थी?”
“साहब बहुत चाहते हैं।”
“और एलना?”
“वो भी साहब को चाहती थी मगर साहब बहुत ही ज्यदा प्यार करते थे।”
“कर्नल के ड्यूटी पर जाने के बाद एलना क्या करती थी?” मैंने अगला सवाल किया।
“अक्सर किताबें पढ़ा करती थी।” नौकर ने बताया—“कभी-कभी टहलने भी जाती थीं।”
“किताबें कैसी पढ़ती थीं?”
“उपन्यास।”
“कर्नल का कभी एलना से झगड़ा भी हुआ था?” मैंने एक अन्तिम सवाल किया।
“बस एक बार।”
“कब?”
“पिछले हफ्ते।”
“किस बात पर?”
“एक पार्टी के पीछे।” नौकर बोला—“शायद कोई काकटेल पार्टी थी। वहां मादाम जाना चाहती थीं मगर साहब पसन्द नहीं करते थे, लेकिन झगड़ा जल्दी खत्म हो गया था।”
“अब मैं चलती हूं।” मैं बोली—“अगर फिर कभी कुछ पूछना हुआ तो फिर आऊंगी।”
“जी।”
मैं वहां से चल दी।
कार का रूख साहिली इलाके की ओर था।
साहिली इलाके में शाम के समय अच्छा-खासा रश रहता है। विभिन्न देशों के जहाज जो लंगर डाले खड़े रहते हैं, उनके कर्मचारी शाम साहिली इलाके के होटलों में बिताते हैं। इस इलाके का कोई होटल ऐसा नहीं बचता, जिसमें भीड़ न रहती हो। इस तरह लड़कियों का व्यवसाय भी अच्छा चलता है। बाहर से आये हुए लोग उनके साथ मनोरंजन करते हैं और उन्हें एवज में भारी रकम भी मिल जाती है।
साहिली इलाके में अच्छी-खासी भीड़ थी।
मैंने अपनी कार एक खाली जगह पर रोकी, फिर कार लॉकर करने के उपरान्त पैदल ही उस तरफ बढ़ी, जिधर होटल और रेस्तरा बने हुए थे।
“ब्लू।”
मैं इस होटल के आगे रुकी।
कर्नल ने होटल का यही नाम बताया था।
मैं आगे बढ़ी और दरवाजा खोलकर भीतर प्रवेश किया। हाल में कोई सीट खाली नहीं थी। हर सीट पर लोग जमे हुए थे और उनका मनोरंजन करने वाली युवतियां कुर्सियों के हत्थों पर जमी हुई थी। मैंने हाल का निरीक्षण किया। विभिन्न देशों के लोग वहां मौजूद थे, उनमें दो अफ्रीकी भी शामिल थे।
में काउन्टर की ओर बढ़ी।
काउन्टर पर गंजे सर वाला एक बूढ़ा मौजूद था, जिसने मेरा मुस्करा कर स्वागत किया।
“यहां बैठने लायक कोई जगह नहीं है?”
“आप लेट हो गयीं।” बूढ़ा बोला—“अगर कुछ देर पहले आई होतीं तो जगह मिल जाती।”
“खैर।” मैंने काउन्टर से टिकते हुए कहा—“एक डबल पैग व्हिस्की तो दो।”
बूढ़े ने तत्परता से डबल पैग व्हिस्की बनाई।
“आप सोडा लेना पसन्द करेंगी?”
“नहीं, सिर्फ बर्फ।”
बूढ़े ने आईस पीस गिलास में डालकर गिलास मेरी ओर सरका दिया। मैंने गिलास उठाया और वहीं खड़े-खड़े हॉल में मौजूद दोनों अफ्रीकियों की ओर देखा।
दोनों थर्ड क्लास शराब की बोतल सामने रखे हुए बातों में व्यस्त थे और अन्य लोगों की तरह उनकी टेबिल पर कोई लड़की नहीं थी।
“आप शायद पहली बार ही यहां आई हैं?” बूढ़े ने आगे झुककर मुझसे पूछा।
“हूं।” मैंने व्हिस्की सिप करके कहा।
“अफसोस, आपको खड़े-खड़े पीना पड़ रहा है।” बूढ़े ने अफसोस जाहिर किया।
“कोई बात नहीं।”
बूढ़ा कुछ नहीं बोला।
“एक बात मैं नहीं समझी।”
“क्या?”
“हॉल में सबके पास कोई न कोई लड़की मौजूद है।” मैं बोली—“मगर वो अफ्रीकी अकेले हैं।”
“पिछले एक हफ्ते से यह लोग बराबर यहां आ रहे हैं।” बूढ़ा बोला—“और मैंने एक दिन भी इन लोगों के साथ किसी औरत को नहीं देखा।”
एक बात तो साफ हो गई थी कि ये लोग एक सप्ताह से यहीं पर थे।
“क्या ये बाहर के हैं?”
“हां, अमेरिकी बेड़े के कर्मचारी हैं।”
“रोज अकेले बैठते हैं?”
“हां।”
“शायद यह लोग इन्सान नहीं हैं।”
“हो सकता है।” बूढ़ा हंसा।
“वैसे मुझे ऐसा याद पड़ता है कि इनमें से एक अफ्रीकी परसो शहर में दिखा था।”
“आपका ख्याल ठीक है।” बूढ़े ने कहा—“मुझे भी याद आया, परसों यह दोनों होटल नहीं आये थे, मगर कल से फिर नजर आ रहे हैं।”
मुझे ऐसा लगा कि मैं सही जगह पहुंची हूं। परसों रात ही एलना गायब हुई थी, परसों ही कर्नल के नौकर ने एक अफ्रीकी को कोठी के इर्द-गिर्द मंडराते देखा था। यानि इन दोनों में से ही कोई था।
फिर भी अभी मैं कोई निश्चित धारणा नहीं कायम कर सकती थी, क्योंकि हो सकता है परसों दोनों किसी अन्य होटल में बैठ गये हों।
तभी मेरे दिमाग में एक विचार आया।
मैंने पहले गिलास खाली किया, फिर बिल चुका कर बाहर आई। पास ही एक पब्लिक काल बूथ था। मैंने बूथ में प्रवेश करने के बाद द्वार बन्द किया और अपने एक नये सहायक जैकी का नम्बर डायल किया। जैकी अपर ग्रेड में अभी आया था और थाम्पसन ने उसे मेरे साथ अटैच किया था।
“जैकी स्पीकिंग।”
“मैं मोना बोल रही हूं।”
“ओह मोना डार्लिंग तुम, अभी तक कहां थीं?” जैकी बोला—“मैं तो तुम्हारी याद में....।”
“तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?”
“आप....।”
“मैं मोना चुंग बोल रही हूं।”
“अरे आप मेरी बॉस।”
“तुम्हें एक काम सौप रही हूं।”
“जरूर-जरूर।”
मैंने उसे समझाया।
“ऑल राइट मादाम।”
मैंने फोन रखा, फिर बाहर आकर इधर-उधर देखने के बाद पुनः होटल ब्लू में प्रवेश कर गई। हॉल में भीड़ की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था। मैं पहले की तरह इस बार भी काउन्टर की ओर बढ़ गई।
“अरे आप फिर....?” बूढ़ा चौंका।
“दूसरे होटलों से तो गनीमत है।” मैंने काउन्टर से टिक कर कहा।
“ही-ही-ही।” उसने अपनी नकली बत्तीसी निपोर कर कहा—“हमारे होटल की यही खूबी है, जो एक बार आता है। वो फिर दोबारा आये बिना नहीं रहता।”
“व्हिस्की पिलवाओ।”
बूढ़े ने व्हिस्की पिलाई।
तभी फोन की घन्टी बजी।
बूढ़े ने फोन उठाया—“होटल ब्लू।”
“..........”
मैं निश्चिन्तता से व्हिस्की पी रही थी। मुझे विश्वास था कि फोन जैकी का ही रहा होगा।
“हां-हां, दो अफ्रीकी हॉल में मौजूद हैं।” बूढ़े ने कहा—“लेकिन आप कौन बोल रहे हैं?”
“..........”
हालांकि उस तरफ से बोलने वाले का स्वर सुनाई नहीं दे रहा था, पर मैं समझ गई थी फोन जैकी का है। मैंने उसे यही काम सौंपा था।
“यहां बुलाऊं?” बूढ़ा बोला।
“..........”
“मगर किसे?”
“होल्ड ऑन।” बूढ़े ने कहकर फोन स्टैन्ड पर टांगा, फिर वेटर को संकेत से बुलाकर उन दोनों अफ्रीकियों में से एक को फोन पर बुला लाने के लिए कहा।
“वेटर चला गया।”
“अजीब-अजीब फोन आते हैं।” बूढ़े ने मुंह बनाकर रिसीवर को घूरते हुए कहा।
मैं कुछ नहीं बोली।
वेटर ने जाकर उन अफ्रीकियों से बूढ़े का संदेश कहा। दोनों के चेहरों पर आश्चर्य के भाव उभरे, फिर उन्होंने आपस में कुछ बात की। दूसरे ही क्षण एक लम्बे कद वाला अफ्रीकी उठा और काउन्टर की तरफ आया।
“योर फोन सर।” बूढ़ा बोला।
अफ्रीकी ने फोन उठाया।
“हैलो।” वह बोला।
“मैं हेनफी बोल रहा हूं।”
“..........”
“कौन एलना?”
“..........”
“तुम कौन बोल रहे हो?”
“..........”
“मैं किसी एलना को नहीं जानता?”
मैं कनखियों से उसके चेहरे का निरीक्षण कर रही थी और यह भांप लिया था कि वह लम्बे कद का अफ्रीकी एकदम सफेद झूठ बोल रहा है।
“..........”
“सुनो।” अफ्रीकी बोला।
“..........”
“तुम टिम्बर एस्टेट में मिलो।” अफ्रीकी ने जैकी से कहा—“वहां बात की जा सकती है।”
“..........”
अफ्रीकी ने फोन रख दिया।
उसके अपनी मेज पर लौट जाने के बाद मैंने एक गिलास व्हिस्की और ली, फिर दोनों गिलासों का भुगतान करके आराम से विहस्की पीने लगी।
दोनों अपनी टेबिल पर मुंह-से-मुंह मिलाये हुए बात कर रहे थे।
मेरा दूसरा गिलास भी खत्म हो गया। वो दोनों भी उठने की तैयारी में थे।
मैं गिलास रखकर बाहर आयी और अपनी कार की ओर बढ़ी। टिम्बर स्टेट से मैं अनजान नहीं थी। मैंने कार की ड्राइविंग सीट सम्भाली और तेज गति से चलाने लगी।
टिम्बर एस्टेट में एक गोदाम के पीछे मैंने कार छिपाई और लॉक करके आगे आई। एस्टेट में इस वक्त सन्नाटा छाया हुआ था। वास्तव में यह टाइम शरीफ आदमियों के आराम करने का होता है, मगर वास्तव जासूस और अपराधी दोनों की गिनती शरीफों में नहीं होती। पब्लिक अपराधी से भी डरती है और जासूस से भी।
एक जगह खड़े होकर मैंने हलक से उल्लू की आवाज निकाली जो वास्तव में जैकी के लिये संकेत था, लेकिन संकेत के उत्तर में मुझे संकेत नहीं मिला।
जैकी अभी नहीं आया था।
मैंने सिगरेट निकालने के लिए जेब में हाथ डाला ही था कि एक कार की हैड लाइट्स चमकीं फिर कार करीब आती गई। कार का द्वार खुला और ऑटोमेटिक लाइट जली जिसमें से मैंने अगली सीट पर बैठे दोनों अफ्रीकियों को आसानी से देख लिया।
अब केवल वे दो ही नहीं थे उनके साथ दो और थे।
मैं लकड़ी के लट्ठों की आड़ में हो गई।
वे चारों एक जगह एकत्र थे।
कुछ देर बाद ही मैंने मोटर साईकिल के इन्जन का शोर सुना और फिर कुछ देर बाद एक मोटर साईकिल उन चारों के पास आकर रुकी। वे चारों सिंगल हैडलाइट के प्रकाश से नहा गये थे। जैकी ही था वो। उसने इन्जन बन्द कर दिया।
“हैलो माई डियर नीग्रो।” जैकी की आवाज आई।
“नीचे उतरो।”
“उतरता हूं दोस्त।” जैकी ने कहा, फिर उतर कर मोटर साईकिल स्टेन्ड पर खड़ी की।
“फोन तुमने किया था?” एक ने पूछा।
“यस।” जैकी बोला—“फोन करना मेरी हॉबी है।”
“एलन से तुम्हारी क्या रिश्तेदारी है?”
“रिश्तेदारी, ओह कितने निर्दयी हो तुम, आह कितना दर्दनाक सवाल किया है।”
“यह क्या बकवास है?”
“बकवास नहीं है दोस्त।” जैकी बोला—“एलना से मुहब्बत करता था, गहरी मुहब्बत और उसे मैं उस नालायक बूढ़े कर्नल के पंजे से छुड़ाना चाहता था, मगर सत्यानाश हो तुम लोगों का, तुम उसे बीच में ही ले उड़े।”
“यू शटअप।” एक ने डांटा।
“आई एम शटअप।” जैकी तुरन्त बोला।
“तुम्हें यह किसने बताया कि एलना हमारे पास है?” एक ने जैकी से सवाल किया।
“मैंने सपने में देखा था।” जैकी हांफ रहा था—“कि मेरी शहजादी को काला शैतान ले जा रहा....”
मगर इसके आगे के वाक्य जैकी के हलक में ही रह गये क्योंकि एक ने उसकी ठोढ़ी पर घूंसा जमा दिया था। चूंकि जैकी अपना संतुलन कायम न रख सका था अतः गिर पड़ा।
“क्या यह शराफत है?” जैकी उठ खड़ा हुआ—“क्या इसी को सभ्यता कहते हैं?”
“बको मत।”
“अच्छा प्यारे हमको ही डांट रहे हो।” जैकी बोला—“एक तो हमारी महबूबा का अपहरण किया दूसरे हम पर रौब डाल रहे हो। लानत है तुम्हारी बदमाशी पर।”
“देखो मिस्टर अगर तुमने चुपचाप हमारे सवालों का जवाब नहीं दिया तो हम तुम्हें यहीं कत्ल कर देंगे।” एक ने गुर्राहट भरे स्वर में जैकी को धमकाया।
“क्या?” जैकी रो देने वाले स्वर में बोला।
“हमारे पास रिवॉल्वर भी है।”
“आरे तो पहले क्यों नहीं बताया था।” जैकी रोहांसा हो गया था—“मैं भी राइफल ले आता।”
“हमारे पास वक्त कम है।”
“मैं भी ऐसा महसूस कर रहा हूं कि मेरा भी वक्त बहुत कम रह गया है।”
“जल्दी बोलो।” वही अफ्रीकी बोला—“यह तुम्हें किसने बताया कि एलना हमारे पास है?”
“एक लड़की ने।”
मैं सब सुन रही थी साथ-ही-साथ जैकी के अभिनय की प्रशंसा भी कर रही थी।
“कौन लड़की?”
“पता नहीं।” वह डरे हुए व्यक्ति की तरह बोल रहा था—“मैं उसे नहीं जानता मगर वो मुझे जानती है। उसी ने मुझे फोन पर बताया था कि तुम लोगों ने ही एलना को उड़ाया है और वो तुम्हारे पास है इसीलिए फोन किया।”
“तुम उसे नहीं जानते।”
“नहीं।”
“वो तुम्हें जानती है?”
“हां।”
“यह कैसे हो सकता है?”
“यह मुझे नहीं पता लेकिन यह सच है कि वो जानती है कि मैं एलना का प्रेमी हूं।”
“मुझे यह फ्रॉड लगता है।”
उन लोगों ने आफ्रीकी भाषा में बात की जिसे मैं तो समझ गई क्योंकि मैं कई भाषायें जानती हूं मगर जैकी बेचारा समझ नहीं पाया था।
“इसे भी वहीं ले चलो।”
“ले चलने की क्या जरूरत है?” एक ने राय दी—“इसे यहीं गोली मार दो।”
“नहीं-नहीं।” दूसरे ने फौरन टोका—“क्या पता यह सरकारी जासूस हो और इसने हमारे बारे में और लोगों को भी बता दिया हो...नतीजे में हम फंसे।”
“फंसे तो अभी भी हैं।”
“अभी बचने का रास्ता है।” वही बोला—“अगर यह वास्तव में एलना का प्रेमी होगा तो एलना पहचान जायेगी और अगर उसने नहीं पहचाना तो समझ लो जासूस है।”
“तो वहीं ले चलें?”
“ले चलना ही पड़ेगा।”
“तो चलो।”
“ऐ हाथ उठाओ।”
“क्यों!”
“हमारे हाथ में पिस्तौल है।” वह बोला—“जैसा हम कह रहे हैं वैसा करते चलो वर्ना मरोगे।”
“अच्छा भाई!” जैकी ने शायद हाथ उठाये।
मैं समझी थी कि शायद वो लोग कार से जायेंगे मगर वे लोग पैदल ही आगे बढ़ गये।
मैं स्वयं को अन्धेरे में रखे हुए दबे पांव उन लोगों का पीछा कर रही थी।
वे लोग चुपचाप आगे बढ़ रहे थे।
एक लकड़ी की ऊंची सी इमारत के आगे वे रुके और एक ने आगे बढ़ कर इमारत का द्वार विशेष तरीके से थपथपाया और कुछ देर बाद द्वार खुल गया।
वे सब भीतर चले गये।
उन लोगों के जाने के बाद मैं आगे बढ़ी और इमारत के अगले भाग की ओर बढ़ने के बजाये पिछले भाग की ओर बढ़ी; पिछले भाग में अन्धेरा था। मैं इमारत के पास पहुंची। भीतर घुसने की कोई गुंजाइश नहीं थी। मैं वापस तेजी से अपनी कार की तरफ दौड़ी, अगली सीट के नीचे से मैंने मजबूत रेशमी डोरी निकाली जिसके एक सिरे में लोहे का हुक लगा हुआ था। मैं डोरी लेकर वापस पहुंची और रस्सी की लच्छी खोल कर हुक इमारत के ऊपरी भाग की ओर फेंका। हुक कहीं जाकर फंस गया। मैंने रस्सी खींच कर देखी। हुक मजबूती से लटका हुआ था। रस्सी पकड़ कर मैं ऊपर चढ़ गई। छत पर पहुंच कर एक क्षण मैंने आराम किया, फिर जेब से रिवॉल्वर निकाल कर हाथ में लिया और जीने की तरफ बढ़ी जो नीचे की तरफ जाता था। जीने पर मैं बहुत सम्भल कर हल्की सी आहट किये बिना उतर रही थी।
ऊपरी मंजिल सुनसान पड़ी हुई थी।
दूसरी मजिल पर न सिर्फ रोशनी थी बल्कि बातें करने की आवाज भी आ रही थी।
मैं आवाज की तरफ बढ़ी।
कारीडोर में कोई नहीं था मगर एक कमरे में से रोशनी आ रही थी, आवाजें भी उसी में से आ रही थीं। मैंने इधर-उधर आहट ली, फिर कमरे की तरफ बढ़ी और एक खिड़की से भीतर झांका, भीतर जैकी भी था और वे चारों भी। उनके अलावा दो आदमी एक युवती को पकड़े थे जिसे मैं पहचान गई। वह एलना ही थी, फोटो से उसकी शक्ल मिलती थी।
“इसे पहचानती हो?”
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Additional information
Book Title | ब्लैक डेविल : Black Devil by Helen |
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Isbn No | |
No of Pages | 184 |
Country Of Orign | India |
Year of Publication | |
Language | |
Genres | |
Author | |
Age | |
Publisher Name | Ravi Pocket Books |
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