बारूद का पुतला
केन्द्रीय खुफिया विभाग के चीफ श्रीमान शशांक चक्रवर्ती ने हाथ में थमे रिमोट का एक पुशबटन दबाया और इसके साथ ही टीoवीo ऑन हो गया।
करीब बैठे विक्रांत की नजर स्क्रीन पर जम गयी। स्क्रीन पर एक घाटी का दृश्य दिखलायी दे रहा था। कुछ क्षणों बाद दृश्य बदला और वृक्षों से घिरा एक पहाड़ी गांव नजर आने लगा। गांव के करीब तीन-मंजिली इमारत थी और उसके कम्पाउण्ड में एक राडार लगा हुआ था।
टीoवीo कैमरा कुछ क्षणों तक टॉवर पर स्थिर रहा और इसके पश्चात् दृश्य फिर बदला। स्क्रीन पर अब पहाड़ी श्रृंखला नजर आ रही थी।
दृश्य कुछ क्षणों तक स्थिर रहा और इसके पश्चात् चक्रवर्ती महाशय ने रिमोट का पुशबटन दबा दिया।
स्क्रीन अंधकार में डूब गयी।
“हूं।” चक्रवर्ती महाशय ने पाइप सुलगाया और विक्रांत की ओर देखकर बोले—“विक्रांत, तुमने स्क्रीन पर जिस गांव को देखा है, वो म्यांमार का एक पहाड़ी गांव है।”
“गांव का नाम?”
“फाल्का।”
“गांव में सेना की चौकी भी है?”
“हां।” कहकर चक्रवर्ती महाशय ने पाइप का कश लिया और धुआं उगलकर बोले—“और फिलीपींस के उस यात्री विमान को आखिरी दफा इसी चौकी के राडार पर देखा गया था।”
“उसके पश्चात्—?”
“विमान रंगून नहीं पहुंचा और उससे पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया, मगर ये बात सच नहीं है। मैं तुम्हें एक तस्वीर दिखाता हूं।”
विक्रांत मेज पर झुक गया।
चक्रवर्ती महाशय ने सामने रखी फाईल से एक तस्वीर निकाली और विक्रांत के सामने रख दी। तस्वीर एक ऐसे विमान की थी—जो एक पहाड़ी को उड़ाकर बनायी गयी हवाई पट्टी पर पड़ा था—और पूरी तरह से जल चुका था। तस्वीर में विमान के स्थान पर केवल एक फौलादी ढांचा नजर आता था।
तस्वीर को ध्यान से देखते हुए विक्रांत ने पूछा—“अंकल—ये तस्वीर क्या उसी यात्री विमान की है?”
“हां।”
“किन्तु आप तो कह रहे हैं कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।”
“तुम क्या सोचते हो?”
“इसमें सोचने जैसी कोई बात ही नहीं है, अंकल!” विक्रांत बोला—“यदि ये तस्वीर उसी विमान की है—तो सीधी-सी बात है कि विमान का अपहरण करके उसे हवाई पट्टी पर उतारा गया और इसके पश्चात् समस्त यात्रियों को बाहर निकालकर विमान को आग लगा दी गयी।”
“बिल्कुल ठीक सोचा तुमने, विक्रांत—मेरा ख्याल है—ऐसा ही हुआ है।”
“चीफ अंकल—हुआ यही है। अन्यथा यदि विमान दुर्घटनाग्रस्त होता—तो उसका मलबा सैकड़ों टुकड़ों में बंट जाता। जबकि इस तस्वीर के अनुसार विमान का ढांचा पूरी तरह से सुरक्षित है।”
“लेकिन...?” चक्रवर्ती महाशय ने फिर पाइप का कश लिया और बोले—“मुख्य प्रश्न तो ये है कि विमान में सवार एक सौ बीस व्यक्तियों का क्या हुआ? उन्हें विमान के साथ ही जला दिया गया—अथवा वो सभी लोग भागने में सफल हो गए?”
“इस सम्बन्ध में म्यांमार पुलिस और सेना की क्या रिपोर्ट है?”
“विमान में मौजूद सभी यात्रियों को जिंदा जला दिया गया है।”
“मैं इसे सच नहीं मानता।”
“अर्थात् ऐसा नहीं हुआ?”
“हां।”
“और क्या हो सकता है?”
“इस सम्बन्ध में पूरी रिपोर्ट तो मैं आपको वहां पहुंचकर ही दूंगा, मगर ये तय है कि यात्रियों को जिंदा नहीं जलाया गया है।”
“लेकिन विक्रांत...!”
“अंकल—आप ये क्यों नहीं सोचते कि जिन लोगों ने अपनी जान हथेली पर रखकर विमान का अपहरण किया होगा—इसके पीछे उन लोगों का कोई खास उद्देश्य रहा होगा! जबकि उन्होंने जिस विमान का अपहरण किया—उसे सकुशल नीचे उतारकर आग लगा दी—और जैसा कि आप बता रहे हैं—यात्रियों को जिन्दा जला दिया गया। आखिर क्या हासिल हुआ उन अपहरणकर्ताओं को?”
विक्रांत के इस प्रश्न पर चक्रवर्ती महाशय कुछ क्षणों तक मौन रहे।
पाइप बुझ चुका था।
उसे रखकर वो बोले—“विक्रांत—मैंने तुमसे बताया था कि फिलीपींस के उस यात्री विमान में हमारे देश के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर के○ सुन्दरम् भी मौजूद थे—जो अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए मनीला जा रहे थे—। उनके साथ उनके सहयोगी डॉक्टर दुर्रानी भी थे—। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि विमान का अपहरण केवल डॉक्टर सुन्दरम् और दुर्रानी की वजह से किया गया हो और अपहरणकर्ताओं ने इन दोनों को विमान से उतारकर शेष लोगों को जिन्दा जला दिया हो? तुम जानते हो कि परमाणु शक्ति के क्षेत्र में आज हमारा देश किसी भी देश से पीछे नहीं है और इसका श्रेय जाता है हमारे परमाणु वैज्ञानिकों को। ये भी तुम जानते हो कि संसार में ऐसे कई देश हैं—जो हमारे देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र के रूप में देखकर बुरी तरह से बौखला गए हैं।”
“मैं आपका अभिप्राय समझ रहा हूं, अंकल—ये बात सच हो सकती है; लेकिन विमान के शेष यात्रियों को जिन्दा जलाया गया है—अथवा डॉक्टर केo सुन्दरम् और डॉक्टर दुर्रानी के साथ उन्हें भी किसी दूसरे स्थान पर ले जाया गया है—इस विषय की सही जानकारी तो मुझे घटनास्थल और विमान के मलबे को देखकर ही मिलेगी। अब ये बताइए कि मुझे अपना काम कब से शुरू करना है?” उत्साहित से स्वर में विक्रांत ने पूछा।
“आज से, बल्कि अभी से।” चक्रवर्ती महाशय बोले—“मैं तुम्हारी यात्रा का प्रबन्ध करता हूं। बटलर भी तुम्हारे साथ रहेगा।”
“ओoकेo अंकल!” विक्रांत उठ गया।
“बैस्ट आफ लक।”
¶¶
बटलर!
दुबला पतला किन्तु फुर्तीला जिस्म और पहनावा अजीब-सा। ऐसा कि देखने वाला किसी सर्कस का जोकर समझ बैठे।
छींट की शर्ट और पतलून का एक पाँयचा घुटनों से गायब। एक पांव में चप्पल—दूसरे में जूता और आंखों पर एक लैंस का चश्मा। सिर के बाल बढ़े हुए—हिप्पियों जैसे।
शाम का वक्त था और वो एक चौराहे पर खड़ा आती-जाती लड़कियों को देखकर अपनी आंखें सेंक रहा था। तभी वो चौंका—चार-पांच लड़कियों का झुंड जो उसी की ओर आ रहा था—एकाएक उसे देखकर चहक-सा पड़ा।
“अरे शनु—देख तो इण्डिया सर्कस।”
“कहां?”
“वो रहा—सामने।”
“अरे हां—इसे तो मैंने कल के शो में देखा था।”
“आओ—इससे कुछ बात करें।”
“आओ! आओ अनु।”
“मारे गए,” सुनकर बटलर बड़बड़ाया—“ये साली तो गुड एण्ड शुड इंसान को जोकर ऑफ सर्कस समझ रही हैं। लेकिन नो ऐनी बात, देखता हूं। मैंने भी इन्हें जोकर की परिभाषा न समझायी—तो माइ नेम इज नाट बटलर।”
तभी लड़कियां सामने आ गयीं।
आते ही उनमें से एक ने बटलर को सम्बोधित किया—“हैलो!”
बटलर हिलने लगा।
“श्रीमान जोकर!” बटलर को हिलते देखकर लड़की हंसी और बोली—“हमने आपसे हिलने के लिए नहीं कहा है—बल्कि आपको सम्बोधित किया है।”
“आंए।” बटलर ने आंखें मटकायीं और हाथों को नचाते हुए बोला—“आपने—आपने मुझे सम्बोधित किया है? यानि कुछ कहा है मुझसे? कितना खुशनसीब हूं मैं—कितना भाग्यशाली। काश ऊपर वाले ने आपको मेरे नसीब में लिखा होता। आइ मीन आप मेरी वाइफ होतीं और मैं आपका हसबैंड होता। बट ये लव होता कैसे? इन दिस वर्ल्ड होता तो वही है न—जो इंसान के भाग्य में होता है।”
“व्हाट!”
“अब देखिए न—माइ ग्रैण्ड फादर एक अंग्रेज महिला से प्यार करते थे—; मगर हुआ ये कि हमारा देश आजाद हो गया एण्ड अंग्रेज अपना बैग एण्ड बैगेज समेटकर हिंदुस्तान से चले गए। अब मैं अपने फादर के विषय में कुछ दिलचस्प बातें बताता हूं।”
“ओह प्लीज!” लड़की उसकी बकवास से ऊबकर बोली—“हम लोग तो आपका इंटरव्यू लेने आये थे—। हम ये जानना चाहते थे— कि आपको जोकर बनने की प्रेरणा किसने दी—आप जोकर कब बने और क्यों बने? क्या आप हमारे प्रश्नों के उत्तर देंगे?”
“वैरी वैरी गुड प्रश्न किए हैं आपने।” बटलर बोला—“इफ ये क्वैश्चन माई बीवी ने किए होते तो मैं उसका मुख चूम लेता। बट—क्योंकि आपसे मेरा ऐसा कोई रिश्ता नहीं है—सो आइ केन नाट डू ऐसी बद्तमीजी; लेकिन एक बात बताइए। सपोज आपके एण्ड मेरे बीच लाईक सो हो जाता है तो आपको ऐसी प्रेरणा कौन देगा?”
लड़कियां एक-दूसरे का चेहरा देखने लगीं।
एक ने दूसरी के कान में कहा—“अनु—मुझे लगता है—ये जोकर नहीं है।”
“और?”
“कोई पागल है—जो पागलखाने से भाग आया है। सुना नहीं—कभी ये अपनी बीवी बनाने की बात करता है और कभी मुंह चूमने को कहता है।”
“ये तो है।”
“भागो यहां से। कोई ऐसी-वैसी हरकत कर बैठा तो मुसीबत खड़ी हो जायेगी।”
इसके पश्चात् वही हुआ।
लड़कियां सिर पर पांव रखकर भागीं।
बटलर चिल्लाया—“सुनो तो बीवियों—आप लोग कहां भाग रही हैं?” इसके पश्चात् बटलर ने लम्बी गहरी सांस ली और बड़बड़ाया—“बेड़ा गर्क! इन लाइफ वन चांस आवाज मिला एण्ड वो भी हैंड से निकल गया।”
तभी वो चौंक गया।
पीछे से आने वाली एक टैक्सी उसके निकट आकर रुकी थी। टैक्सी रुकते ही साइड विंडो खुली और आवाज आयी—“हैलो मामा!”
बटलर ने देखा—ये विक्रांत था। झपटकर वो खिड़की के पास पहुंचा और हैरत से बोला—“भांजे यू—!”
“यहां क्या कर रहे थे—?”
“मुसीबत टाल रहा था, भांजे।” बटलर ने नाक पर फिसलते एक लैंस वाले चश्मे को ठीक किया और बोला—“असल में माइ एक फ्रैंड है डॉक्टर खड़खड़ानी। एक दिन मेरी आंखें देखकर बोले—दिन में दो दफा ब्यूटीफुल एण्ड यंग गर्ल्स को देखा करो—आई साइट ठीक हो जायेगी।”
“अंदर आओ।”
बटलर टैक्सी में बैठ गया।
टैक्सी दौड़ने लगी। विक्रांत ने बटलर से पूछा—“अंकल ने फोन किया होगा?”
“गंजे चीफ की बात कर रहे हो?”
“बड़ों का सम्मान करना चाहिए।”
“वो तो मैं पिछले जन्म से ही करता आ रहा हूं। बट बात फोन की थी—फोन आया था। बोले—फटाफट गो रंगून एण्ड ब्रिंग फॉर माई चांद ऐनी बढ़िया-सी मैडिसिन।”
“और इसके पश्चात् तुम्हें तैयारी शुरू कर देनी चाहिए थी।”
“तैयार तो मैं हूं ही, भांजे।” बटलर बोला—“सी टू माई पतलून—इम्पोर्टेड माल है। एण्ड दिस गॉगल। हिंदुस्तान में अभी ऐसी कोई आप्टीकल फैक्ट्री नहीं जो इसका दूसरा लैंस बना सके। इससे बड़ी तैयारी और क्या हो सकती है? जब कहोगे—चल दूंगा।”
“हूं।” विक्रांत ने इतना ही कहा और विंडो से बाहर देखने लगा।
बटलर की आंखों पर चढ़ा एक लैंस वाला चश्मा फिर से नीचे आ गया था।
¶¶
admin –
Aliquam fringilla euismod risus ac bibendum. Sed sit amet sem varius ante feugiat lacinia. Nunc ipsum nulla, vulputate ut venenatis vitae, malesuada ut mi. Quisque iaculis, dui congue placerat pretium, augue erat accumsan lacus